महाराष्ट्र में ईसाई (ख्रिश्चन) समाज का अस्तित्व खत्म हो रहा है या इसे खत्म करने की साजिश हो रही है
महाराष्ट्र में ईसाई (ख्रिश्चन) समाज का अस्तित्व खत्म हो रहा है या इसे खत्म करने की साजिश हो रही है
मुंबई / प्रतिनिधी
महाराष्ट्रा और देश के प्रगति एवं उन्नति मे ईसाई (ख्रिश्चन) समाज के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, परंतु फिर भी पिछले 40 सालों मे महाराष्ट्रा के मंत्रीमंडल मे किसी भी ईसाई व्यक्ति को मौका नही दिया गया है. ऐसे नोवेल साळवे यांनी सांगितले.
ये बात अलग है कि ईसाई समाज का वोट बॅंक बटा हुआ होने के कारण आज के तारीख मे इस समाज का कोई विधायक महाराष्ट्र मे चुनाव जीत कर नही आ सकता है, किन्तु ईसाई समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए महाराष्ट्र के राजनीतिक पार्टीयों ने बढा दिल दिखाकर ईसाई समाज के व्यक्ति को विधानपरिषद के जरिये मंत्रीमंडल मे स्थान देने का इतिहास बना सकते है.
लेकिन अफ़सोस कि बात तो यह है की ईसाई ( ख्रिश्चन) समाज के साथ महाराष्ट्र के राजकारण मे अक्सर दुजा भाव किया जाता रहा है, इसलिए आज भी महाराष्ट्र के राजकारण मे इस बात से ये पुष्टि की जा सकतीं है की महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यांक आयोग पर एक भी ईसाई ( ख्रिश्चन) व्यक्ती की नियुक्ती नही की गई है.
मेरा सभी राजनीतिक दलों के सम्माननीय नेताओं से अनुरोध है की जीस तरहा सभी धर्म और जाति के व्यक्ति को राजकारण मे उनके समाज के लोगों का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया जाता है उसीतरह ईसाई (ख्रिश्चन) समाज के व्यक्ति को भी राजकारण मे उनके समाज का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया जाना चाहिये.
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